Tuesday, 3 December 2013

गाजर(carrot )


तन की दुर्गध .............

गाजर का जूस रोज पिएं। तन की दुर्गध दूर भगाने में यह कारगर है।

सर्दियों के मौसम में डाइट में बहुत बदलाव आ जाता है। इस सीजन में हमें विटामिन व न्यूट्रिशंस से भरपूर कई चीजें खाने को मिलती हैं और गाजर भी इन्हीं में से एक है। इसमें विटामिन और मिनरल्स बहुत मात्रा में मिलते हैं। डाइटीशन एकता टंडन के मुताबिक, गाजर बेहद फायदेमंद होता है। इसमें विटामिन ए, विटामिन बी, सी, कैल्शियम और पैक्टीन फाइबर होता है, जो कॉलेस्ट्रोल का लेवल बढ़न
े नहीं देता।

आप गाजर इस तरह ले सकते हैं :
रोजाना गाजर का जूस लेने से आपको सर्दी व जुकाम नहीं होगा। गाजर का जूस बॉडी की इम्यूनिटी बढ़ाने का काम करता है और इससे आप जर्म्स व इंफेक्शन वगैरह होने से बचे रहते हैं।

गाजर में विटामिन ए और सी होता है। इसके अलावा, इसमें प्रचुर मात्रा में मिनरल व सिलिकॉन होते हैं, जिससे आपकी आंखों की रोशनी अच्छी रहती है।

गाजर का जूस स्किन को साफ रखता है और चेहरे पर चमक भी आती है।

अगर आप अपने बच्चे को दूध पिलाती हैं, तो गाजर दूध की मात्रा बढ़ाने में सहायक है।

आपको गाजर से कई विटामिन व मिनरल्स मिलते हैं। इसमें एंटीऑक्सिडेंट बीटा कैरोटिन, अल्फा कैरोटिन, कैल्शियम, विटामिन ए, बी1, बी2, सी और ई भी है। एंटीऑक्सिडेंट से स्किन में चमक आती है।

जिन लोगों को हड्डियों वगैरह की तकलीफ है, उन्हें डाइट में गाजर जरूर लेनी चाहिए। इससे आपकी बॉडी में कैल्शियम की मात्रा बढ़ेगी और आपकी बॉडी इस तरह मिलने वाले कैल्शियम को जल्दी ऑब्जर्ब करेगी। अगर आप कॉपर, आयरन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और सल्फर वगैरह की टेबलेट लेते हैं, तो उससे बेहतर है कि आप गाजर खाएं।

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गाजर के फायदे :

इससे इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत होता है।

स्किन को सन डैमेज से राहत मिलती है।

दिल से जुड़ी बीमारियां कम होती हैं।

ब्लड प्रेशर नॉर्मल रहता है।

मसल्स स्ट्रॉन्ग बनती हैं और स्किन हेल्दी होती है।

अनीमिया से बचाव रहता है।

एक्ने कम होते हैं।

आंखों की बीमारियों कम होती हैं।
कच्चे आलू का रस आर्थरायटिस से ग्रस्त रोगी के लिए जैसे एक वरदान है। आलू लेकर छील लिया जाए, कीसनी से बारिक बारिक कर लिया जाए और एक गिलास पानी (२५० मिली) में रात भर इन बारीक आलू टुकडों को डुबोय रखा जाए। अगली सुबह इसे छानकर पानी का सेवन किया जाए, ऐसा लगातार एक माह तक किया जाए। आधुनिक शोधों के अनुसार खनिज लवणों और कार्बनिक नमक की उपस्थिती आलू को आर्थरायटिस के निवारण के लिए एक बेहतर उपाय बनाती है।

औषधीय गुणों की खान है गर्म पानी 

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गुनगुना पानी और स्वास्थ्य-

गुनगुने पानी को मुंह में घुमा घुमा कर घूंट घूंट करके पीने से मोटापा नियंत्रित होता है ।

गुनगुना पानी जोड़ों के बीच चिकनाई का काम करता है, जिससे गठिया रोगों की आशंका काफी कम हो जाती है।


गुनगुना पानी शरीर में मौजूद गंदगी को साफ करने की प्रक्रिया तेज करता है और गुर्दों के माध्यम से गंदगी बाहर निकल जाती हैं।

पाचन किर्या मजबूत होती है कब्ज से रहत मिलती है ।

थोड़ा अधिक गुनगुना गर्म पानी रक्तप्रवाह को सुचारू रखता है।


गुनगुने पानीमें नींबू और शहद मिलाकर लेने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है।

गुनगुना पानी सौंदर्य और स्वास्थ्य को और त्वचा संबंधी बीमारियों को ठीक रखता है

पानी से प्यास बुझने के साथ साथ पाचन-तंत्र से लेकर मस्तिष्क विकास में महत्वपूर्ण योगदान होता है।

गुनगुना पानी घूंट घूंट करके पिने से शरीर ज्यादा हल्का चुस्त और दुरुस्त होता है

बचपन से अगर शरीर को पर्याप्त पानी नहीं मिलेगा, तो हड्डियां भी कमजोर होंगी।

मेहनत करने के पहले थोड़ा गुनगुना पानी पी ले थकान कम महसूस होगी और आपका शरीर ज्यादा हल्का महसूस करेगा ।

माइग्रेन (आधे सिर का दर्द) MIGRAINE/HEMICRANIA 

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इस रोग से पीड़ित रोगी के सिर में बहुत तेज दर्द होता है तथा यह दर्द सिर के एक भाग में होता है। इस रोग का इलाज प्राकृतिक चिकित्सा से किया जा सकता है।

माइग्रेन (आधे सिर में दर्द) रोग होने का लक्षण:-

इस रोग से पीड़ित रोगी के सिर के आधे भाग में तेज दर्द होता है तथा सिर में दर्द होने के साथ-साथ रोगी को उल्टी होने की इच्छा भी होती है। इसके अलावा रोगी को चिड़चडाहट तथा दृष्टिदोष भी उत्पन्न होने लगता है। इस रोग का प्रभाव अधिकतर निश्चित समय पर होता है।

माइग्रेन (आधे सिर में दर्द) रोग होने का कारण-

1. माइग्रेन (आधे सिर में दर्द) रोग रोगी व्यक्ति को दूसरे रोगों के फलस्वरूप हो जाता है जैसे- नजला, जुकाम, शरीर के अन्य अंग रोग ग्रस्त होना, पुरानी कब्ज आदि।

2. स्त्रियों को यदि मासिकधर्म में कोई गड़बड़ी हो जाती है तो इसके कारण स्त्रियों को माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) हो जाता है।


3. आंखों में दृष्टिदोष तथा अन्य रोग होने के कारण भी माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) हो जाता है।

4. यकृत (जिगर) में किसी प्रकार की खराबी तथा शरीर में अधिक कमजोरी आ जाने के कारण व्यक्ति को माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) हो जाता है।


5. असंतुलित भोजन का अधिक उपयोग करने के कारण रोगी को माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) हो सकता है।

6. अधिक श्रम-विश्राम करने, शारीरिक तथा मानसिक तनाव अधिक हो जाने के कारण भी यह रोग व्यक्तियों को हो सकता है।


7. औषधियों का अधिक उपयोग करने के कारण भी माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) हो जाता है।



माइग्रेन रोग से पीड़ित व्यक्ति का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार:-


1. इस रोग से पीड़ित रोगी का प्राकृतिक चिकित्सा से इलाज करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को रसाहार (चुकन्दर, ककड़ी, पत्तागोभी, गाजर का रस तथा नारियल पानी) आदि का सेवन भोजन में करना चाहिए और इसके साथ-साथ उपवास रखना चाहिए।

माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) से पीड़ित रोगी को अधिक मात्रा में फल, सलाद तथा अंकुरित भोजन करना चाहिए और इसके बाद सामान्य भोजन का सेवन करना चाहिए।


3. रोगी व्यक्ति को अपने भोजन में मेथी, बथुआ, अंजीर, आंवला, नींबू, अनार, अमरूद, सेब, संतरा तथा धनिया अधिक लेना चाहिए। माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) से पीड़ित रोगी को भोजन संबन्धित गलत आदतों जैसे- रात के समय में देर से भोजन करना तथा समय पर भोजन न करना आदि को छोड़ देना चाहिए।

4. रोगी व्यक्ति को मसालेदार भोजन का उपयोग नहीं करना चाहिए तथा इसके अलावा बासी, डिब्बाबंद तथा मिठाइयों आदि का सेवन भी नहीं करना चाहिए।


5. माइग्रेन (आधे सिर में दर्द) रोग में रोगी व्यक्ति को कुछ दिनों तक तुलसी के पत्तों का रस शहद के साथ सुबह के समय में चाटना चाहिए तथा इसके अलावा दूब का रस भी सुबह के समय में चाट सकते हैं। जिसके फलस्वरूप माइग्रेन रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

6. माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) का इलाज करने के लिए पीपल के कोमल पत्तों का रस रोगी व्यक्ति को सुबह तथा शाम सेवन करने के लिए देने के फलस्वरूप माइग्रेन रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।


7. माइग्रेन रोग का इलाज करने के लिए रोगी व्यक्ति के माथे पर पत्ता गोभी का पत्ता प्रतिदिन बांधना चाहिए, जिसके फलस्वरूप यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।


8. प्राकृतिक चिकित्सा के द्वारा नाक से भाप देकर रोगी व्यक्ति के माइग्रेन रोग को ठीक किया जा सकता है। नाक से भाप लेने के लिए सबसे पहल एक छोटे से बर्तन में गर्म पानी लेना चाहिए। इसके बाद रोगी को उस बर्तन पर झुककर नाक से भाप लेना चाहिए। इस क्रिया को कुछ दिनों तक करने के फलस्वरूप माइग्रेन रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।


9. माइग्रेन रोग को ठीक करने के लिए कई प्रकर के स्नान भी हैं जिन्हे प्रतिदिन करने से रोगी व्यक्ति को बहुत अधिक लाभ मिलता है। ये स्नान इस प्रकार हैं-रीढ़स्नान, कुंजल, मेहनस्नान तथा गर्मपाद स्नान।


10. माइग्रेन (आधे सिर में दर्द) रोग का इलाज करने के लिए प्रतिदिन ध्यान, शवासन, योगनिद्रा, प्राणायाम या फिर योगासन क्रिया करनी चाहिए। इसके फलस्वरूप यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

उड़द की दाल 


- इसे दालों की महारानी कहा जाता है.
- उड़द को एक अत्यंत पौष्टिक दाल के रूप में जाना जाता है, - छिलकों वाली उड़द की दाल में विटामिन, खनिज लवण तो खूब पाए जाते हैं और कोलेस्ट्रॉल नगण्य मात्रा में होता है।
- धुली हुई दाल प्रायः पेट में अफारा कर देती है। छिलकों वाली दाल में यह दुर्गुण नहीं होता।
- गरम मसालों सहित छिलके वाली दाल ज्यादा गुणकारी होती है।


- सप्ताह में तीन दिन भोजन में उड़द की छिलके वाली दाल का सेवन किया जाए, तो यह शरीर को बहुत लाभ करती है। यदि इसमें नींबू मिलाकर खाएँ तो इसका स्वाद बढ़ जाता है और पाचन भी सरल हो जाता है।


- यदि रोगी की जठराग्नि मंद हो तो उड़द का पाक या उड़द के लड्डू बनाकर सेवन कराते हैं। उड़द की दाल को पिसवाकर उसमें सभी प्रकार के मेवे मिलाकर लड्डू बनाते हैं, ये लड्डू अत्यंत शक्ति वर्द्धक होते हैं। इस लड्डू का सेवन निर्बल, कमजोर तथा व्यायाम करने वाले भी करते हैं। इन लड्डुओं का सेवन सिर्फ शीत ऋतु में ही किया जाना चाहिए। शीत ऋतु में पाचन शक्ति प्रबल होती है, इसलिए शीत ऋतु उत्तम मानी गई है।


- इसमें कैल्सियम, पोटेशियम, लौह तत्व, मैग्नेशियम, मैंगनीज जैसे तत्व आदि भी भरपूर पाए जाते है और इसे बतौर औषधि कई हर्बल नुस्खों में उपयोग में लाया जाता है।


- छिलकों वाली उडद की दाल को एक सूती कपडे में लपेट कर तवे पर गर्म किया जाए और जोड दर्द से परेशान व्यक्ति के दर्द वाले हिस्सों पर सेंकाई की जाए तो दर्द में तेजी से आराम मिलता है। काली उडद को खाने के तेल में गर्म करते है और उस तेल से दर्द वाले हिस्सों की मालिश की जाती है। जिससे दर्द में तेजी से आराम मिलता है।
- इसी तेल को लकवे से ग्रस्त व्यक्ति को लकवे वाले शारीरिक अंगों में मालिश करनी चाहिए, फायदा होता है।
- दुबले लोग यदि छिलके वाली उड़द दाल का सेवन करे तो यह वजन बढाने में मदद करती है। अपनी दोनो समय के भोजन में उड़द दाल का सेवन करने वाले लोग अक्सर वजन में तेजी से इजाफा होता हैं।
- फोडे फुन्सियों, घाव और पके हुए जख्मों पर उड़द के आटे की पट्टी बांधकर रखने से आराम मिलता है। दिन में 3-4 बार ऐसा करने से आराम मिल जाता है।
- डांग गुजरात के आदिवासियों के अनुसार गंजेपन दूर करने के लिए उड़द दाल एक अच्छा उपाय है।दाल को उबालकर पीस लिया जाए और इसका लेप रात सोने के समय सिर पर कर लिया जाए तो गंजापन धीरे-धीरे दूर होने लगता है और नए बालों के आने की शुरुआत हो जाती है।


- डांग- गुजरात के आदिवासी मानते है कि उड़द के आटे की लोई तैयार करके दागयुक्त त्वचा पर लगाया जाए और फ़िर नहा लिया जाए तो ल्युकोडर्मा (सफ़ेद दाग) जैसी समस्या में भी आराम मिलता है।
- जिन्हें अपचन की शिकायत हो या बवासीर जैसी समस्याएं हो, उन्हें उडद की दाल का सेवन करना चाहिए। इसके सेवन से मल त्याग आसानी से होता है।


- उड़द की बिना छिलके की दाल को रात को दूध में भिगो दिया जाए और सुबह इसे बारीक पीस लिया जाए। इसमें कुछ बूंदें नींबू के रस और शहद की डालकर चेहरे पर लेप किया जाए तो एक घंटे बाद इसे धो लिया जाए। ऐसा लगातार कुछ दिनों तक करने से चेहरे के मुहांसे और दाग दूर हो जाते है और चेहरे में नई चमक आ जाती है।
- इसमें बहुत सारा आयरन होता है, जिसे खाने से शरीर को बल मिलता है। इसमें रेड मीट के मुकाबले कई गुना आयरन होता है ।
- जिन लोगों की पाचन शक्ति प्रबल होती है, वे यदि इसका सेवन करें, तो उनके शरीर में रक्त, मांस, मज्जा की वृद्धि होती है। इसमें बहुत सारे घुलनशील रेशे होते हैं जो कि पचने में आसान होते हैं। 


- हृदय स्‍वास्‍थ्‍य- कोलेस्‍ट्रॉल घटाने के अलावा भी काली उड़द स्‍वास्‍थ्‍य वर्धक होती है। यह मैगनीशियम और फोलेट लेवल को बढा कर धमनियों को ब्‍लॉक होने से बचाती है। मैगनीशियम, दिल का स्‍वास्‍थ्‍य बढाती है क्‍योंकि यह ब्‍लड सर्कुलेशन को बढावा देती है।


- 20 से 50 ग्राम उड़द की दाल छिलके वाली रात को पानी में भिगो दें, सुबह इसका छिलका निकालकर बारीक पीस लें। इस पेस्ट को इतने ही घी में हलकी आँच पर लाल होने तक भूनें, फिर उसमें 250 ग्राम दूध डालकर खीर जैसा बना लें, इसमें स्वाद के अनुसार थोड़ी सी मिश्री मिलाकर इसका सुबह खाली पेट सेवन करें। इससे शरीर ,दिल और दिमाग की शक्ति बढती है. 


एक सप्ताह तक इसका सेवन करने से पुराने से पुराना मूत्र रोग ठीक हो जाता है।यदि युवतियाँ इस खीर का सेवन करें तो उनका रूप निखरता है। स्तनपान कराने वाली युवतियों के स्तनों में दूध की वृद्धि होती है। यदि गर्भाशय में कोई विकार है तो दूर होता है। पुरुष हो या स्त्री, उड़द के लड्डू या खीर का नियमपूर्वक सेवन तीन माह करने से नवयौवन मिलता है, यदि यौवन है, तो वह और निखरता है।

बादाम  (almond )


बादाम गरम, स्निग्ध, वायु को दूर करने वाला, वीर्य को बढ़ाने वाला है। बादाम बलप्रद एवं पौष्टिक है किंतु पित्त एवं कफ को बढ़ाने वाला, पचने में भारी तथा रक्तपित्त के विकारवालों के लिए अच्छा नहीं है।

औषधि-प्रयोगः
शरीर पुष्टिः रात्रि को 4-5 बादाम पानी में भिगोकर, सुबह छिलके निकालकर पीस लें फिर दूध में उबालकर, उसमें मिश्री एवं घी डालकर ठंडा होने पर पियें। इस प्रयोग से शरीर हृष्ट पुष्ट होता है एवं दिमाग का विकास होता है। पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए तथा नेत्रज्योति बढ़ाने के लिए भी यह एक उत्तम प्रयोग है। बच्चों को 2-3 बादाम दी जा सकती हैं। इस दूध में अश्वगंधा चूर्ण भी डाला जा सकता है।

बादाम का तेलः इस तेल से मालिश करने से त्वचा का सौंदर्य खिल उठता है व शरीर की पुष्टि भी होती है। जिन युवतियों के स्तनों के विकास नहीं हुआ है उन्हें रोज इस तेल से मालिश करनी चाहिए। नाक में इस तेल की 3-4 बूँदें डालने से मानसिक दुर्बलता दूर होकर सिरदर्द मिटता है और गर्म करके कान में 3-4 बूँदें डालने से कान का बहरापन दूर होता है।


बादाम तेल का प्रयोग रंगत में निखार लाता है और बेजान त्वचा को रौनक प्रदान करता है। त्वचा की खोई नमी लौटाने में भी बादाम तेल सर्वोत्तम माना गया है।

त्वचा को नरम, मुलायम बनाने के लिए भी आप इसे लगा सकते हैं। नहाने से 2-3 घंटे पहले इसे लगाना आदर्श रहता है। बादाम तेल की मालिश न सिर्फ बालों के लिए अच्छी होती है, बल्कि मस्तिष्क के विकास में भी फायदेमंद होती है। हफ्ते में एक बार बादाम तेल की मालिश गुणकारी है।

बादाम तेल का इस्तेमाल बाहर से किया जाए या फिर इसका सेवन किया जाए, यह हर लिहाज से उपचारी और उपयोगी साबित होता है। हर रोज रात को 250 मिग्रा गुनगुने दूध में 5-10 मिली बादाम तेल मिलाकर सेवन करना लाभदायक होता है।

हड्डियां होती हैं मजबूत
बादाम में मौजूद फॉस्फोरस हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाता है। इसके साथ ही इनसे जुड़ी बीमारियां होने का खतरा कम हो जाता है।

भोजन के बाद रक्त में बढ़ने वाले शुगर के स्तर को कम करने की शक्ति बादाम में होती है। इसके अलावा इसमें विटामिन ई भी भरपूर मात्रा में होता है, जिससे त्वचा संबंधी विकारों में फायदा मिलता है।

बादाम के अंदर पोटेशियम होता है जो की ब्लड प्रेशर को सामान्य बनाए रखता है।

बादाम खाना खाने के बाद शुगर और इंसुलिन का लेवल बढ़ने से रोकता है, जिससे मधुमेह की बीमारी से बचा जा सकता है

बादाम गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत फायदेमंद होता है। बादाम में फोलिक एसिड होता है ,इसके कारण जच्चे-बच्चे में रक्त की कमी नहीं होती।

बादाम में मैग्निशियम,कॉपर और रिबोफ्लेविन जैसे पोषक तत्व होते हैं, जो की शरीर की ऊर्जा को बढ़ाने में मदद करते हैं। बादाम दिमाग के साथ-साथ शरीर को भी फिट रखता है। बादाम में मौजूद मिनरल्स विटामिंस,डायटरी फाइबर दिमाग को तरोताजा रखने के साथ-साथ शरीर की मेटाबॉलिज्म में भी मददगार होता है

रोजाना बादाम का सेवन करने से सर्दी-जुकाम जैसी बीमारियों से भी बचा जा सकता है।

रोजाना बादाम की 5-8 गिरी खाने से बालों को गिरने की समस्या भी कम होती है।

दूध में कुछ बूंदे बादाम के तेल की डालकर,दसका सेवन करने से कफ संबंधी रोगों में कमी आती है। शरीर में संचित कफ धीरे-धीरे बाहर निकलने लगता है।

      खजूर




* दांतों का गलना – छुहारे खाकर गर्म दूध पीने से कैलशियम की कमी से होने वाले रोग, जैसे दांतों की कमजोरी, हड्डियों का गलना इत्यादि रूक जाते हैं।
* रक्तचाप – कम रक्तचाप वाले रोगी 3-4 खजूर गर्म पानी में धोकर गुठली निकाल दें। इन्हें गाय के गर्म दूध के साथ उबाल लें। उबले हुए दूध को सुबह-शाम पीएं। कुछ ही दिनों में कम रक्तचाप से छुटकारा मिल जायेगी।
* कब्ज – सुबह-शाम तीन छुहारे खाकर बाद में गर्म पानी पीने से कब्ज दूर होती है। खजूर का अचार भोजन के साथ खाया जाए तो अजीर्ण रोग नहीं होता तथा मुंह का स्वाद भी ठीक रहता है। खजूर का अचार बनाने की विधि थोड़ी कठिन है, इसलिए बना-बनाया अचार ही ले लेना चाहिए।
* पुराने घाव – पुराने घावों के लिए खजूर की गुठली को जलाकर भस्म बना लें। घावों पर इस भस्म को लगाने से घाव भर जाते हैं।


* मासिक धर्म : छुहारे खाने से मासिक धर्म खुलकर आता है और कमर दर्द में भी लाभ होता है।
* खजूर गर्भवती महिलाओं में दूध की मात्रा में वृद्धि करता है और अधिक ऊर्जा प्रदान करता है।
* आंख की पलक पर गुहेरी रोग हो जाता है। खजूर की गुठली को रगड़कर गुहेरी पर लगाए। आराम मिलेगा।
* मोटापा - खजूर का सेवन मोटापा लाता है तथा शरीर का भार बढ़ता है, अतः मोटे व्यक्ति सोचकर खाए। दुबले व्यक्ति भार बढ़ाने के लिए खा सकते हैं।
* जिनकी पाचन शक्ति अच्छी हो वे खजूर खाएं, क्योंकि यह पचाने में समय लेती है। छुहारे, पुरा वर्ष उपलब्ध रहते है। खजूर केवल सर्दी में तीन महीने। जब जो उपलब्ध हो, उसका सेवन करें।